30 अक्टूबर 2025 को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रक्षा विभाग को निर्देश दिया कि वे 33 साल के अंतराल के बाद तुरंत परमाणु हथियार परीक्षण फिर से शुरू करें। यह घोषणा उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से दक्षिण कोरिया के बुसान में मिलने से पहले Truth Social पर की।
राष्ट्रपति ट्रंप ने इस निर्णय का कारण रूस और चीन जैसे देशों के साथ रणनीतिक संतुलन बनाए रखना बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए परमाणु शस्त्रागार का परीक्षण “बराबरी के स्तर” पर करना आवश्यक है। रूस ने हाल ही में नए परमाणु प्रणालियों का परीक्षण किया, जबकि चीन अपनी परमाणु क्षमता बढ़ा रहा है, जो 2025 में 600 से बढ़कर 2030 तक 1,000 वारहेड्स तक पहुंच सकता है।
इस निर्देश से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हुई है। सीनेटर एडवर्ड मार्की ने नए परमाणु परीक्षणों पर रोक लगाने के लिए कानून पेश करने की योजना बनाई है। उन्होंने चेतावनी दी कि परीक्षण फिर से शुरू करने से अंतरराष्ट्रीय हथियार नियंत्रण ढांचे को अस्थिर कर सकता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस कदम की निंदा हो रही है। आलोचकों का कहना है कि इससे रणनीतिक स्थिरता में कमी आएगी और यह वैश्विक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि (CTBT) का उल्लंघन है। अमेरिका ने CTBT पर हस्ताक्षर किए हैं, लेकिन इसे अब तक मंजूरी नहीं दी है।
अमेरिका ने आखिरी बार 1992 में परमाणु परीक्षण किया था। परीक्षण फिर से शुरू करने से नए हथियारों की दौड़ और अप्रसार प्रयासों पर असर पड़ने की चिंता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे वैश्विक सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
