सूडान के एल-फाशेर से भागे जीवित लोगों ने आतंक और लाशों की कथा सुनाई
अक्टूबर 2025 के अंत में, सूडान के दारफुर क्षेत्र के एल-फाशेर शहर पर Rapid Support Forces (RSF) ने कब्जा कर लिया, जिससे मानवीय संकट उत्पन्न हो गया। हजारों नागरिकों ने यहां से पलायन किया, जो बड़े पैमाने पर हत्याओं और तबाही की भयावह घटनाओं को साझा कर रहे हैं।
हत्या और अत्याचार की वारदातें
रिपोर्टों के अनुसार, RSF लड़ाकों ने सामूहिक हत्याएं कीं, जिसमें एल-फाशेर के सऊदी अस्पताल में 400 से अधिक लोगों की हत्या शामिल है। Yale के Humanitarian Research Lab द्वारा विश्लेषण किए गए सैटेलाइट चित्रों में अत्याचारों के संकेत पाए गए, जैसे कि अस्पतालों के पास लाशें और सामूहिक हत्याएं। RSF, जो जनजातीय मिलिशिया ‘जंजावीड’ से विकसित हुई है, को इन जघन्य हिंसाओं के आरोपों का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें एल-फाशेर में हाल ही के सैटेलाइट विश्लेषण द्वारा सुझाई गई सामूहिक हत्याएं शामिल हैं।
सुरक्षा के लिए संकटपूर्ण यात्रा
जीवित रहने वाले लोग एल-फाशेर से लगभग 70 किलोमीटर पश्चिम स्थित तविला जैसे शहरों तक संकटपूर्ण पलायन का वर्णन करते हैं। यह यात्रा खतरनाक है, जहां मार्ग में भूख, प्यास या हिंसा से मरे हुए लोगों की लाशें पड़ी हैं। 20 वर्षीय जीवित व्यक्ति नाजेर मुहाना अली ने चार दिवसीय कठिन यात्रा का वर्णन किया, जिसमें उन्हें RSF लड़ाकों द्वारा पिटाई और लूटपाट का सामना करना पड़ा। उन्होंने और उनके परिवार ने जानवरों के लिए बने कड़वे मूंगफली के छिलके ‘ओम्बाज़’ का उपयोग जीवित रहने के लिए किया और बारिश का पानी पीकर अपनी प्यास बुझाई।
मानवीय संकट और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
संयुक्त राष्ट्र और राहत एजेंसियों ने स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। 36,000 से अधिक लोग एल-फाशेर से भाग चुके हैं, लेकिन केवल थोड़ी संख्या ही सहायता केंद्रों तक पहुँच पाई है, जिससे वहां फंसे लोगों के लिए भय बढ़ रहा है। अप्रैल 2023 में सूडानी सेना और RSF के बीच शुरू हुए संघर्ष ने 40,000 से अधिक मौतें और 14 मिलियन लोगों का विस्थापन किया है। यू.एन. नेताओं ने तत्काल कार्रवाई की मांग की है, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की पूर्व अनित्यता पर शोक प्रकट किया है।
जैसे-जैसे संकट बढ़ता जा रहा है, अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर दबाव है कि वह हस्तक्षेप करे और दारफुर में प्रभावित जनसंख्या को मानवीय सहायता प्रदान करे।
