ट्रंप और शी ने व्यापार समझौता किया, अमेरिका-चीन तनाव में कमी
30 अक्टूबर, 2025 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बुसान, दक्षिण कोरिया में मुलाकात की, जिसके परिणामस्वरूप एक महत्वपूर्ण व्यापार समझौता हुआ है। यह समझौता दोनों आर्थिक शक्तियों के बीच चल रहे तनाव को कम करने के उद्देश्य से है। इस समझौते में अमेरिकी टैरिफ में कटौती और चीन द्वारा अमेरिका की प्रमुख चिंताओं को संबोधित करने की प्रतिबद्धता शामिल है।
समझौते के प्रमुख बिंदु
इस समझौते के तहत, अमेरिका ने चीनी वस्तुओं पर टैरिफ को 57% से घटाकर 47% करने पर सहमति जताई है। विशेष रूप से, फेंटेनाइल से संबंधित टैरिफ 20% से घटाकर 10% किया गया है, जो इस शर्त पर आधारित है कि चीन अमेरिका में इस ओपिओइड की तस्करी को रोकने के प्रयासों को तेज करेगा। इसके बदले में, चीन ने कम से कम एक वर्ष के लिए अपने रेयर अर्थ एक्सपोर्ट को बनाए रखने की प्रतिबद्धता जताई है, जो विभिन्न उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण सामग्री की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करता है। इसके अतिरिक्त, चीन ने अगले तीन वर्षों में अमेरिकी सोयाबीन की 25 मिलियन मीट्रिक टन वार्षिक खरीद फिर से शुरू करने पर सहमति जताई है।
नेताओं की प्रतिक्रियाएं और भविष्य की योजनाएं
राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बैठक को “12 में से 10” अंक दिए, जो अमेरिका-चीन संबंधों के भविष्य को लेकर उनकी आशावादिता को दर्शाता है। उन्होंने अप्रैल में चीन की यात्रा की योजना की घोषणा की ताकि साझेदारी को और मजबूत किया जा सके। राष्ट्रपति शी ने भी इस भावना को दोहराया और दोनों देशों के बीच सहयोग के महत्व पर जोर दिया। दोनों नेताओं ने स्वीकार किया कि यह समझौता एक सकारात्मक कदम है, लेकिन ताइवान और उन्नत प्रौद्योगिकी प्रतिबंध जैसे कई विवादित मुद्दे अभी भी बने हुए हैं।
बाजार और विश्लेषकों की प्रतिक्रियाएं
घोषणा का वित्तीय बाजारों पर हल्का प्रभाव देखा गया, अमेरिकी सोयाबीन वायदा या चीनी स्टॉक सूचकांक में ज्यादा उछाल नहीं देखा गया। विश्लेषक चेतावनी देते हैं कि यह समझौता अस्थाई राहत प्रदान करता है, लेकिन कई मूलभूत मुद्दे अभी भी बने हुए हैं और यह समझौता अस्थिर हो सकता है। रेयर अर्थ एक्सपोर्ट को बनाए रखने की प्रतिबद्धता को वैश्विक सप्लाई चैन को स्थिर करने के रूप में देखा जा रहा है, विशेषकर ऑटोमोटिव और रक्षा क्षेत्रों में। हालांकि, समझौते की दीर्घकालिक प्रभावशीलता दोनों देशों की प्रतिबद्धताओं के अनुपालन और अंतर्निहित विवादों के समाधान पर निर्भर करेगी।
